NCERT Solutions for Class 12 History Chapter 12 Framing the Constitution इतिहास पाठ 12 संविधान का निर्माण
Question 1:
What were the ideals expressed in the Objectives Resolution?
उद्देश्य संकल्प में व्यक्त किए गए आदर्श क्या हैं?
Answer
उद्देश्य प्रस्ताव’ में आजाद भारत के संविधान के मूल आदर्शों की रूपरेखा पेश की गई थी। इस प्रस्ताव के माध्यम से उस फ्रेमवर्क को प्रस्तुत किया गया था, जिसके अनुसार संविधान निर्माण के कार्य को आगे बढ़ाना था। यह उद्देश्य प्रस्ताव 13 दिसम्बर, 1946 को जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा के सामने प्रस्तुत किया। इस प्रस्ताव में भारत को एक स्वतंत्र, सम्प्रभु गणराज्य घोषित किया गया था। नागरिकों को न्याय, समानता एवं स्वतंत्रता का आश्वासन दिया गया था और यह वचन दिया गया था कि अल्पसंख्यकों, कों पिछड़े एवं जनजातीय क्षेत्रों और दमित एवं अन्य पिछड़े वर्गों के लिए पर्याप्त रक्षात्मक प्रबंध किए जाएँ।
Question 2:
How was the term minority defined by different groups?
अल्पसंख्यक शब्द को विभिन्न समूहों द्वारा कैसे परिभाषित किया गया?
Answer
विभिन्न समूह ‘अल्पसख्यक’ शब्द को निम्नलिखित तरह से परिभाषित कर रहे थे:
(1) कुछ लोग मुसलमानों को ही अल्पसंख्यक कह रहे थे। उनका तर्क था कि मुसलमानों के धर्म, रीति-रिवाज़ आदि हिंदुओं से बिलकुल अलग हैं और वे संख्या में हिंदुओं से कम हैं।
(2) कुछ लोग दलित वर्गके लोगों को हिंदुओं सेअलग करके देख रहे थेऔर वह उनके लिए अधिक स्थानों का आरक्षण चाहते थे।
(3) कुछ लोग आदिवासियों को मैदानी लोगों से अलग देखकर आदिवासियों को अलग आरक्षण देना चाहते थे।
(4) मद्रास के बी. पोकर बहादुर नेअगस्त, 1947 मेंसंविधान सभा मेंअल्पसंख्यकों को पृथक् निर्वाचिका देने की बजाय संयुक्त निर्वाचिका की वकालत की और कहा-“उसी के भीतर एक ऐसा राजनीतिक ढाँचा बनाया जाए जिसके अंतर्गत अल्पसंख्यक भी जी सकें और अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक समुदायों के बीच मतभेद कम हो।”
Question 3:
What were the arguments in favour of greater power to the provinces?
प्रांतों को अधिक से अधिक शक्तियों के पक्ष में क्या तर्क थे?
Answer
केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारों अर्थात् प्रांतों अधिकारों के प्रश्न पर भी संविधान सभा में पर्याप्त बहस हुई। संविधान सभा के कुछ सदस्य शक्तिशाली केन्द्र के समर्थक थे, जबकि कुछ अन्य सदस्य प्रांतों के लिए अधिक शक्तियों के पक्ष में थे। ऐसे सदस्यों द्वारा प्रांतों को अधिक शक्तियाँ दिए जाने के पक्ष में अनेक महत्त्वपूर्ण तर्क दिए गए। संविधान के मसविदे में तीन सूचियों-केंद्रीय सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची–को बनाया गया था। केन्द्रीय सूची के विषय केवल केंद्र सरकार और राज्य सूची के विषय केवल राज्य सरकारों के अधीन होने थे। समवर्ती सूची के विषय केंद्र और राज्य दोनों की संयुक्त जिम्मेदारी थे। उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय सूची मेंबहुत अधिक विषयों को रखा गया था। इसी प्रकार प्रांतों की इच्छाओं की कोई परवाह न करते हुए समवर्ती सूची मेंभी बहुत अधिक विषयों को रख दिया गया था।
Question 4:
Why did Mahatma Gandhi think Hindustani should be the national language?
महात्मा गांधी ने क्यों सोचा कि हिंदुस्तानी राष्ट्रभाषा होनी चाहिए?
Answer
महात्मा गाँधी को ऐसा इसलिए लगता था, क्योंकि उनका मानना था कि हिंदुस्तानी भाषा में हिंदी के साथ-साथ उर्दू भी शामिल है और ये दो भाषाएँ मिलकर हिंदुस्तानी भाषा बनी है तथा यह हिंदू और मुसलमान दोनों के द्वारा प्रयोग में लाई जाती है। दोनों को बोलने वालों की संख्या अन्य सभी भाषाओं की तुलना में बहुत अधिक है। यह हिंदू और मुसलमानों के साथ-साथ उत्तर और दक्षिण में भी खूब प्रयोग में लाई जाती है। गाँधी जी यह जानते थे कि हिंदी में संस्कृत और उर्दू में संस्कृत के साथ-साथ अरबी और फ़ारसी के शब्द मध्यकाल से प्रयोग हो रहे हैं।
Question 5:
What historical forces shaped the vision of the Constitution?
किन ऐतिहासिक ताकतों ने संविधान का स्वरूप तय किया?
Answer
(1) संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना के अनुसार अक्टूबर 1946 ई० को किया गया था। इसके सदस्यों का चुनाव 1946 ई० के प्रांतीय चुनावों के आधार पर किया गया था। संविधान सभा मेंब्रिटिश भारतीय प्रांतों द्वारा भेजेगए सदस्यों के साथ-साथ रियासतों के प्रतिनिधियों को भी सम्मिलित किया गया था। मुस्लिम लीग ने संविधान सभा की प्रारंभिक बैठकों में(अर्थात्15 अगस्त, 1947 ई० से पहले) भाग नहीं लिया। इस प्रकार संविधान सभा पर
विशेष रूप से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्यों का प्रभाव था। इसके 82 प्रतिशत सदस्य कांग्रेस के भी सदस्य थे।
(2) भारतीय राष्ट्री य कांग्रेस के सदस्य भिन्न-भिन्न विचारधाराओं का प्रतिनिधित्व करतेथे। यदि उनमें से कुछ ‘निरीश्वरवादी’ एवं ‘धर्मनिरपेक्ष’ थे, तो कुछ, जैसा कि ऐ एंग्लो-इंडियन सदस्य फ्रेंक एंथनी का विचार था, “तकनीकी रूप सेकांग्रेस के, किन्तुआध्यात्मिक स्तर पर आर०एस०एस० तथा हिन्दू महासभा के सदस्य थे। इन सबकी विचारधाराओं ने संविधान के स्वरूप निर्धारण में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।
(3) संविधान सभा में आर्थिक विचारों के विषय पर कुछ सदस्य समाजवादी थेऔर कुछ ज़मींदामींरों का समर्थन करने वाले थे। विभिन्न धर्मों एवं जातियों को प्रतिनिधित्व देनेके उद्देश्य सेसंविधान सभा मेंकुछ स्वतंत्र सदस्य एवं महिलाओं को भी नामांकित किया गया था। इन सभी नेसंविधान के स्वरूप निर्धारण को अनेक रूपों में प्रभावित किया।
(4) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा विधि-विशेषज्ञों को संविधान सभा में स्थान दिए जाने पर विशेष ध्यान दिया गया था। सुप्रसिद्ध विधिवेत्ता एवंअर्थशास्त्री बी०आर० अम्बेडकर संविधान सभा के सर्वाधिक प्रभावशाली सदस्यों में से एक थे। उन्होंने संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में सराहनीय कार्य किया। गुजरात के वकील के० के० एम० तथा मद्रास के वकील अल्लादि कृष्ण स्वामी अय्यर बी०आर० अम्बेडकर के प्रमुख सहयोगी थे। इन दोनों के द्वारा संविधान के प्रारूप पर महत्त्वपूर्णसुझाव प्रस्तुत किए गए।
Question 6:
Discuss the different arguments made in favour of protection of the oppressed groups.
दलित समूहों की सुरक्षा के पक्ष में किए गए विभिन्न तर्कों पर चर्चा करें।
Answer
दमित (दलित) समूहों की सुरक्षा के पक्ष मेंअनेक दावेप्रस्तुत किए गए। उल्लेखनीय है कि राष्ट्री य आंदोलन के काल में बी०आर० अम्बेडर नेदलित जातियों के लिए पृथक् निर्वाचिकाओं की माँग की थी। किन्तु गाँधी जी नेइसका विरोध किया था, क्योंकिक्यों उन्हें लगता था कि ऐसा करनेसेयेसमुदाय सदा के लिए शेष समाज से पृथक् हो जाएँगे। दलित जात्रियों के कुछ सदस्यों का विचार था कि संरक्षण और बचाव के द्वारा ‘अस्पृश्यों’ (अछूतों) की समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता था। जाति-आधारित समाज के कायदे-कानून एवं नैतिक मूल्य उनकी अपंगताओं के प्रमुख कारण थे। तथाकथित सवर्ण समाज उनकी सेवाओं एवं श्रम का तो प्रयोग करता है, किन्तु उनके साथ सामाजिक संबंध स्थापित करने से कतराता है।
Question 7:
What connection did some of the members of the Constituent Assembly make between the political situation of the time and the need for a strong Centre?
संविधान सभा के कुछ सदस्यों ने उस समय की राजनीतिक स्थिति और एक मजबूत केंद्र की आवश्यकता के बीच क्या संबंध देखा?
Answer
संविधान सभा के कुछ सदस्य केन्द्र सरकार को अधिकाधिक शक्तिशाली देखना चाहते थे। ऐसे सदस्यों के विचारानुसार तत्कालीन राजनैतिक परिस्थिति मेंएक शक्तिशाली केंद्र सरकार की नितांत आवश्यकता थी। बी०आर० अम्बेडकर के मतानुसार एक मज़बूत केंद्र ही देश मेंशान्ति और सुव्यवस्था की स्थापना करने में समर्थ हो सकता था। उन्होंने घोषणा की कि वह “एक शक्तिशाली और एकीकृत केंद्र (सुनिए, सुनिए); 1935 के गवर्नमेंट
एक्ट में हमने जो केंद्र बनाया था, उससेभी अधिक शक्तिशाली केंद्र” चाहते हैं। केंद्र की शक्तियों मेंवृद्धि किए जाने के समर्थक सदस्यों का विचार था कि एक शक्तिशाली केंद्र ही सांप्रदायिक हिंसा को रोकने में समर्थहो सकता था। गोपालस्वामी अय्यर प्रांतों की शक्तियों में वृद्धि किए जानेके स्थान पर केंद्र को अधिक शक्तिशाली देखना चाहतेथे। उनका विचार था कि केंद्र अधिक-से-अधिक मज़बूत होना चाहिए।” संयुक्त प्रांत (आधुनिक उत्तर प्रदेश) के एक सदस्य बालकृष्ण शर्मा ने भी एक शक्तिशाली केन्द्र की आवश्यकता पर बल दिया।
उनकी दलील थी कि (1) देश के हित मेंयोजना बनानेके लिए; (2) उपलब्ध आर्थिक संसाधनों को जुटानेके लिए; (3) उचित शासन व्यवस्था की स्थापना करनेके लिए एवं (4) विदेशी आक्रमण सेदेश की रक्षा के लिए एक शक्तिशाली केन्द्र नितांत आवश्यक है। उल्लेखनीय है कि देश के विभाजन से पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस प्रांतों को पर्याप्त स्वायत्तता दिए जानेके पक्ष में थी। हमें याद रखना चाहिए कि कांग्रेस ने कुछ सीमा तक मुस्लिम लीग को भी यह विश्वास दिलानेका प्रयास किया था कि लीग की सरकार वाले प्रांतों में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। किंतु विभाजन के परिणामस्वरूप उत्पन्न हुई परिस्थितियों के कारण अधिकांश राष्ट्रवादियों की राय परिवर्तित हो चुकी
थी।
Question 8:
How did the Constituent Assembly seek to resolve the language controversy?
भाषा विवाद को हल करने के लिए संविधान सभा ने क्या तरीका अपनाया?
Answer
संविधान सभा के सामनेएक अन्य महत्त्वपूर्णप्रश्न राष्ट्र की भाषा को लेकर था। भारत में प्रारंभ से ही अनेक भाषाएँ प्रचलन में रही हैं। देश के भिन्न-भिन्न भागों एवं प्रांतों में भिन्न-भिन्न भाषाओं का प्रयोग किया जाता है। अतः जब संविधान सभा के सामने राष्ट्र की भाषा का मुद्दा आया, तो इस पर कई महीनों तक बहस होती रही और कई बार तनाव की स्थिति भी उत्पन्न हुई। 1930 के दशक तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने यह स्वीकार कर लिया था कि
हिंदुस्तानी को राष्ट्रीय भाषा का दर्जा प्रदान किया जाना चाहिए। हिन्दुस्तानी की उत्पत्ति हिंदी और उर्दू के मेल से हुई थी। यह भारतीय जनता के एक विशाल भाग की भाषा थी। विभिन्न संस्कृतियों के आदान-प्रदान से समृद्ध हुई यह एक साझी भाषा बन गई थी। समय के साथ-साथ इसमेंअनेक स्रोतों सेनए-नए शब्दों और अर्थों का समावेश होता गया, जिसके परिणामस्वरूप विभिन्न क्षेत्रों के अनेक लोग इसे समझने में समर्थ हो गए। गाँधी जी भी हिंदुस्तानी को राष्ट्र भाषा बनाए जाने के पक्ष में थे। उनका विचार था कि हरेक को एक ऐसी भाषा का प्रयोग करना चाहिए, जिसे सभी लोग सरलतापूर्वक समझ सकें।
राष्ट्रभाषा की विशेषताओं पर अपनेविचार व्यक्त करतेहुए गाँधी जी नेकहा था, “यह हिंदुस्तानी न तो संस्कृतनिष्ठ हिंदी होनी चाहिए और न ही फ़ारसीनिष्ठ उर्दू। इसेदोनों का सुन्दर मिश्रण होना चाहिए। उसेविभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं से खुलकर शब्द उधार लेनेचाहिए।” गाँधी जी का विचार था कि हिंदुस्तानी ही हिंदुओं और मुसलमानों को तथा उत्तर और दक्षिण के लोगों को समान रूप सेएकजुट करनेमेंसमर्थहो सकती थी।

